दिल्ली में तलाक की प्रक्रिया – आपसी सहमति और विवादित तलाक | SRLM Law Associates

दिल्ली में तलाक की प्रक्रिया: पूरी जानकारी (2026)

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लेखक: एडवोकेट शुभम मेहता · अपडेट: 5 अक्टूबर 2026 · 8 मिनट

दिल्ली में तलाक की प्रक्रिया दो तरह की होती है: आपसी सहमति से तलाक (हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 13B) और विवादित तलाक (धारा 13)। दोनों मामले जिले के फैमिली कोर्ट में दायर होते हैं। आपसी सहमति का तलाक आमतौर पर 6 से 18 महीने में और विवादित तलाक 2 से 5 साल में पूरा होता है।

इस गाइड में तलाक के आधार, स्टेप-बाय-स्टेप प्रक्रिया, जरूरी दस्तावेज, समय और खर्च की जानकारी दी गई है।

मुख्य बातें

  • तलाक के दो रास्ते हैं: आपसी सहमति (धारा 13B) और विवादित तलाक (धारा 13)।
  • आपसी सहमति के लिए पति-पत्नी का कम से कम एक साल अलग रहना जरूरी है।
  • सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार 6 महीने की कूलिंग अवधि माफ की जा सकती है।
  • केस वहां दायर होता है जहां शादी हुई, साथ रहे या पत्नी रहती है।
  • महिलाओं को DSLSA से मुफ्त कानूनी सहायता मिल सकती है।

दिल्ली में तलाक की प्रक्रिया: दो प्रकार

बिंदुआपसी सहमति से तलाकविवादित तलाक
कानूनधारा 13B, हिंदू विवाह अधिनियमधारा 13, हिंदू विवाह अधिनियम
शर्तएक साल अलग रहना और दोनों की सहमतिक्रूरता, परित्याग जैसे कानूनी आधार
समयलगभग 6–18 महीनेलगभग 2–5 साल
खर्चकमज्यादा
गुजारा भत्तासमझौते से तयकोर्ट तय करता है

अन्य धर्मों के लिए अलग कानून हैं, जैसे विशेष विवाह अधिनियम, 1954 और भारतीय तलाक अधिनियम, 1869। प्रक्रिया लगभग समान रहती है।

आपसी सहमति से तलाक की प्रक्रिया

  1. समझौता तय करें: गुजारा भत्ता, स्त्रीधन, बच्चों की कस्टडी और खर्च।
  2. संयुक्त याचिका फैमिली कोर्ट में दायर करें, दोनों के हलफनामों के साथ।
  3. पहला मोशन: दोनों पक्ष कोर्ट में बयान दर्ज कराते हैं।
  4. कूलिंग अवधि: 6 महीने का इंतजार, जिसे उचित मामलों में माफ किया जा सकता है।
  5. दूसरा मोशन: दोनों पक्ष सहमति दोहराते हैं।
  6. तलाक की डिक्री कोर्ट जारी करता है।

अमरदीप सिंह बनाम हरवीन कौर (2017) में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि 6 महीने की अवधि अनिवार्य नहीं है। विस्तृत दस्तावेज सूची के लिए हमारी mutual divorce documents गाइड देखें।

विवादित तलाक की प्रक्रिया

धारा 13 के मुख्य आधार हैं: क्रूरता, दो साल से अधिक परित्याग, व्यभिचार, धर्म परिवर्तन, गंभीर मानसिक रोग और सात साल से लापता होना।

  1. याचिका दायर करना और दूसरे पक्ष को नोटिस।
  2. लिखित जवाब और अंतरिम भरण-पोषण का आवेदन।
  3. मध्यस्थता केंद्र में सुलह का प्रयास।
  4. मुद्दे तय होना, फिर सबूत और जिरह।
  5. अंतिम बहस और फैसला।

रोहिणी और तीस हजारी फैमिली कोर्ट में हमारे अनुभव में कई विवादित मामले मध्यस्थता के बाद आपसी सहमति में बदल जाते हैं, जिससे समय और खर्च दोनों बचते हैं।

जरूरी दस्तावेज

दस्तावेजक्यों जरूरी
विवाह प्रमाण पत्र या शादी की फोटो/कार्डशादी का सबूत
पति-पत्नी का पता और पहचान प्रमाणअधिकार क्षेत्र और पहचान
आय प्रमाण, ITR, सैलरी स्लिपगुजारा भत्ता तय करने के लिए
संपत्ति और देनदारियों का हलफनामारजनेश बनाम नेहा फैसले के अनुसार
अलग रहने का सबूतधारा 13B के लिए
क्रूरता या परित्याग के सबूतधारा 13 के लिए

समय और खर्च

कोर्ट फीस बहुत कम होती है। मुख्य खर्च वकील की फीस और गुजारा भत्ता है। आपसी सहमति का तलाक सस्ता और तेज होता है। विस्तार से जानने के लिए हमारी cost of divorce in Delhi गाइड देखें।

दिल्ली में तलाक वकील कैसे मदद करते हैं

एक अनुभवी divorce lawyer in Delhi सही कानूनी रास्ता चुनने, समझौते का मसौदा बनाने और कोर्ट में पैरवी करने में मदद करता है। आपसी सहमति के लिए हमारा mutual divorce lawyer in Delhi पेज देखें। अंग्रेजी में पूरी गाइड: divorce process in Delhi।

अपनी स्थिति के अनुसार सलाह के लिए आप किसी योग्य अधिवक्ता से परामर्श कर सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिल्ली में आपसी सहमति से तलाक में कितना समय लगता है?

आमतौर पर 6 से 18 महीने। पहले मोशन के बाद 6 महीने का इंतजार होता है, लेकिन अगर पति-पत्नी डेढ़ साल से अलग रह रहे हैं और समझौता पूरा है, तो कोर्ट यह अवधि माफ कर सकता है। ऐसे में तलाक कुछ हफ्तों में भी हो सकता है।

तलाक का केस कहां दायर करें?

केस उस फैमिली कोर्ट में दायर होता है जहां शादी हुई थी, जहां पति-पत्नी आखिरी बार साथ रहे, जहां प्रतिवादी रहता है, या जहां पत्नी वर्तमान में रहती है। दिल्ली में हर जिले में फैमिली कोर्ट हैं, जैसे रोहिणी, तीस हजारी, साकेत और कड़कड़डूमा।

क्या बिना पति की सहमति के तलाक मिल सकता है?

हां। अगर क्रूरता, परित्याग या अन्य कानूनी आधार साबित हो जाए, तो धारा 13 के तहत विवादित तलाक मिल सकता है। इसमें समय ज्यादा लगता है क्योंकि सबूत और जिरह होती है। कोर्ट पहले मध्यस्थता से सुलह का प्रयास भी करता है।

तलाक के बाद गुजारा भत्ता कैसे तय होता है?

कोर्ट दोनों पक्षों की आय, संपत्ति, शादी की अवधि, बच्चों की जरूरतें और जीवन स्तर देखता है। आपसी सहमति में राशि समझौते से तय होती है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि गुजारा भत्ता सम्मानजनक जीवन के लिए है, संपत्ति बराबर करने के लिए नहीं।

क्या तलाक के लिए कोर्ट में बार-बार जाना पड़ता है?

आपसी सहमति के तलाक में आमतौर पर दो-तीन बार कोर्ट जाना होता है, पहले और दूसरे मोशन के लिए। विवादित तलाक में कई तारीखें होती हैं, खासकर सबूत और जिरह के समय। कई मामलों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से भी पेशी की अनुमति मिलती है।

क्या तलाक के लिए मुफ्त कानूनी सहायता मिलती है?

हां। विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम के तहत सभी महिलाएं, बच्चे और तय आय सीमा से कम आय वाले लोग मुफ्त वकील पा सकते हैं। दिल्ली के हर जिला न्यायालय परिसर में DLSA का कार्यालय है, जहां आवेदन किया जा सकता है।

निष्कर्ष

दिल्ली में तलाक की प्रक्रिया सही जानकारी और तैयारी से आसान हो जाती है। जहां संभव हो, आपसी सहमति और मध्यस्थता का रास्ता चुनें, और सभी दस्तावेज पहले से तैयार रखें।

यह गाइड हिंदू विवाह अधिनियम, 1955, फैमिली कोर्ट अधिनियम, 1984 (India Code पर उपलब्ध) और ऊपर बताए गए सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के आधार पर तैयार की गई है।

Advocate Shubham Mehta, SRLM Law Associates, Delhi

Written and reviewed by Advocate Shubham Mehta
Advocate, Bar Council of Delhi (Enrl. No. D/6398/2021), and head of SRLM Law Associates. He practises before Rohini Courts, other Delhi District Courts, Family Courts, consumer commissions and the Delhi High Court. More about the firm

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This article is for general information only and is not legal advice.