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धारा 144 BNSS भरण-पोषण का प्रावधान उस पत्नी, बच्चे या माता-पिता के लिए है जो खुद अपना खर्च नहीं उठा सकते। अगर पति, पिता या संतान के पास पर्याप्त साधन हैं और वह खर्च देने से इनकार करता है, तो फैमिली कोर्ट मासिक भत्ता तय कर सकता है। यह 1 जुलाई 2024 से पुरानी धारा 125 CrPC की जगह लागू है।
इस गाइड में दावा कौन कर सकता है, राशि कैसे तय होती है, प्रक्रिया, दस्तावेज और वसूली की जानकारी है।
मुख्य बातें
- पत्नी, नाबालिग बच्चे, विकलांग वयस्क संतान और माता-पिता दावा कर सकते हैं।
- तलाकशुदा पत्नी भी, जब तक उसने दोबारा शादी नहीं की, दावा कर सकती है।
- केस के दौरान अंतरिम भरण-पोषण मिल सकता है।
- दोनों पक्षों को संपत्ति और आय का हलफनामा देना होता है।
- बकाया की वसूली के लिए एक साल के भीतर आवेदन करना जरूरी है।
इस गाइड में
धारा 144 BNSS भरण-पोषण: कौन दावा कर सकता है
- पत्नी जो अपना भरण-पोषण नहीं कर सकती, जिसमें तलाकशुदा पत्नी भी शामिल है।
- नाबालिग बच्चे, वैध या अवैध।
- वयस्क संतान (विवाहित बेटी को छोड़कर) जो शारीरिक या मानसिक कारण से खुद का खर्च नहीं उठा सकती।
- माता-पिता, अपने बेटे या बेटी से।
धारा 144(4) के अनुसार पत्नी को भरण-पोषण नहीं मिलेगा अगर वह व्यभिचार में रह रही है, बिना उचित कारण पति के साथ रहने से इनकार करती है, या दोनों आपसी सहमति से अलग रह रहे हैं।
| विषय | नया कानून (BNSS) | पुराना कानून (CrPC) |
|---|---|---|
| भरण-पोषण का आदेश | धारा 144 | धारा 125 |
| प्रक्रिया और अधिकार क्षेत्र | धारा 145 | धारा 126 |
| राशि में बदलाव | धारा 146 | धारा 127 |
| आदेश का पालन | धारा 147 | धारा 128 |
राशि कैसे तय होती है
कानून में कोई अधिकतम सीमा नहीं है। रजनेश बनाम नेहा (2020) में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दोनों पक्षों की आय, संपत्ति, देनदारियां, बच्चों की जरूरतें और ससुराल में जीवन स्तर देखकर राशि तय होगी। भरण-पोषण आमतौर पर आवेदन की तारीख से दिया जाता है।
मोहम्मद अब्दुल समद बनाम तेलंगाना राज्य (2024) में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि तलाकशुदा मुस्लिम महिला भी इस धारा के तहत दावा कर सकती है।
दिल्ली में प्रक्रिया
- जिले के फैमिली कोर्ट में याचिका दायर करें, जहां पति रहता है, पत्नी रहती है या दोनों आखिरी बार साथ रहे।
- संपत्ति और देनदारियों का हलफनामा साथ लगाएं।
- अंतरिम भरण-पोषण का आवेदन दें।
- कोर्ट दूसरे पक्ष को नोटिस भेजता है; वह जवाब और अपना हलफनामा देता है।
- मध्यस्थता का प्रयास किया जाता है।
- अंतरिम आदेश, जिसे कानून 60 दिन में तय करने को कहता है।
- सबूत और बहस के बाद अंतिम आदेश।
जरूरी दस्तावेज
| दस्तावेज | उद्देश्य |
|---|---|
| विवाह प्रमाण | शादी का सबूत |
| बच्चों के जन्म प्रमाण पत्र | बच्चों का दावा |
| पति की आय के सबूत (सैलरी स्लिप, ITR, बैंक स्टेटमेंट) | भुगतान की क्षमता |
| अपने खर्च के बिल (स्कूल फीस, किराया, दवाइयां) | राशि का आधार |
| संपत्ति और देनदारियों का हलफनामा | अनिवार्य खुलासा |
भुगतान न होने पर वसूली
अगर आदेश के बाद भुगतान नहीं होता, तो उसी फैमिली कोर्ट में निष्पादन (execution) याचिका दायर करें। कोर्ट वारंट जारी कर सकता है, वेतन या संपत्ति कुर्क कर सकता है, और हर महीने की चूक पर एक महीने तक की कैद दे सकता है।
रोहिणी और तीस हजारी फैमिली कोर्ट में हमारे अनुभव में सबसे आम गलती बकाया को लंबे समय तक जमा होने देना है। वसूली का आवेदन राशि देय होने के एक साल के भीतर करना जरूरी है।
वकील कैसे मदद करते हैं
एक अनुभवी divorce lawyer in Delhi सही फोरम चुनने, पूरा आय हलफनामा तैयार करने और जल्दी अंतरिम आदेश दिलाने में मदद करता है। घरेलू हिंसा के मामलों में domestic violence lawyer in Delhi से संपर्क करें। अंग्रेजी में पूरी गाइड: maintenance under Section 144 BNSS।
अपनी स्थिति के अनुसार सलाह के लिए आप किसी योग्य अधिवक्ता से परामर्श कर सकते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
धारा 144 BNSS क्या है?
धारा 144 BNSS के तहत पत्नी, बच्चे या माता-पिता, जो खुद अपना खर्च नहीं उठा सकते, उस व्यक्ति से मासिक भरण-पोषण मांग सकते हैं जिसके पास पर्याप्त साधन हैं और जो खर्च देने से इनकार करता है। यह 1 जुलाई 2024 से धारा 125 CrPC की जगह लागू है।
क्या कमाने वाली पत्नी भरण-पोषण मांग सकती है?
हां, अगर उसकी आय ससुराल के जीवन स्तर के अनुसार रहने के लिए पर्याप्त नहीं है। कोर्ट दोनों की आय और जरूरतों की तुलना करता है। कम आय वाली पत्नी को भरण-पोषण मिल सकता है, जबकि पर्याप्त आय वाली पत्नी को कम या कुछ नहीं मिल सकता।
भरण-पोषण कितना मिलता है?
कोई तय राशि या अधिकतम सीमा नहीं है। फैमिली कोर्ट दोनों पक्षों की आय, संपत्ति, देनदारियां, बच्चों की जरूरतें और जीवन स्तर देखता है। सुप्रीम कोर्ट ने पति की शुद्ध आय का लगभग 25% एक मानक के रूप में माना है, लेकिन हर मामला अलग होता है।
अंतरिम भरण-पोषण कब मिलता है?
केस लंबित रहने के दौरान कोर्ट अंतरिम भरण-पोषण दे सकता है। कानून कहता है कि नोटिस के 60 दिन के भीतर इस पर फैसला होना चाहिए, हालांकि व्यवहार में कुछ महीने लग सकते हैं। इसके लिए याचिका के साथ अलग आवेदन देना होता है।
भरण-पोषण न मिलने पर क्या करें?
उसी फैमिली कोर्ट में निष्पादन याचिका दायर करें। कोर्ट वसूली वारंट जारी कर सकता है, वेतन या संपत्ति कुर्क कर सकता है, और हर महीने की चूक के लिए एक महीने तक की कैद दे सकता है। आवेदन एक साल के भीतर करना जरूरी है।
क्या पति धारा 144 BNSS के तहत भरण-पोषण मांग सकता है?
नहीं। धारा 144 BNSS केवल पत्नी, बच्चों और माता-पिता के लिए है। पति हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 24 और 25 के तहत पत्नी से भरण-पोषण मांग सकता है, अगर उसकी अपनी पर्याप्त आय नहीं है और मामला विवाह से संबंधित कार्यवाही में है।
निष्कर्ष
धारा 144 BNSS भरण-पोषण उन परिवारजनों के लिए तेज और प्रभावी उपाय है जिन्हें सहारा नहीं मिल रहा। समय पर याचिका, पूरा आय हलफनामा और अंतरिम आवेदन से जल्दी राहत मिलती है।
यह गाइड भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 144 से 147 (India Code पर उपलब्ध) और ऊपर बताए गए सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के आधार पर तैयार की गई है।
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