चेक बाउंस केस – धारा 138 नोटिस, प्रक्रिया और सजा | SRLM Law Associates

चेक बाउंस केस: दिल्ली में प्रक्रिया, नोटिस और सजा

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लेखक: एडवोकेट शुभम मेहता · अपडेट: 5 अक्टूबर 2026 · 7 मिनट

चेक बाउंस केस नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट, 1881 की धारा 138 के तहत दायर होता है। चेक लौटने की बैंक सूचना मिलने के 30 दिन के भीतर कानूनी नोटिस भेजना होता है, और भुगतान न होने पर 15 दिन बीतने के बाद एक महीने के भीतर कोर्ट में शिकायत दायर करनी होती है। दोषी को दो साल तक की सजा या चेक की दोगुनी राशि तक जुर्माना हो सकता है।

इस गाइड में दिल्ली में चेक बाउंस केस की पूरी प्रक्रिया, दस्तावेज, समय-सीमा और समझौते की जानकारी है।

मुख्य बातें

  • बैंक का रिटर्न मेमो मिलने के 30 दिन के भीतर नोटिस भेजें।
  • नोटिस मिलने के बाद आरोपी को भुगतान के लिए 15 दिन मिलते हैं।
  • उसके बाद एक महीने के भीतर शिकायत दायर करें।
  • केस वहां दायर होता है जहां शिकायतकर्ता का बैंक खाता है।
  • सजा: दो साल तक की कैद या चेक की दोगुनी राशि तक जुर्माना।

चेक बाउंस केस क्या है?

जब किसी कर्ज या देनदारी के भुगतान के लिए दिया गया चेक अपर्याप्त राशि या अन्य कारण से बैंक से लौट आता है, तो धारा 138 के तहत यह अपराध है। कानून मानता है कि चेक किसी देनदारी के लिए दिया गया था (धारा 139), जब तक आरोपी इसका खंडन न करे।

चेक बाउंस केस की प्रक्रिया

  1. चेक जमा करें: चेक की तारीख से 3 महीने के भीतर।
  2. रिटर्न मेमो बैंक से प्राप्त करें।
  3. कानूनी नोटिस 30 दिन के भीतर, स्पीड पोस्ट या रजिस्टर्ड पोस्ट से।
  4. 15 दिन इंतजार करें, आरोपी को भुगतान का मौका दें।
  5. शिकायत दायर करें अगले एक महीने के भीतर, हलफनामे और दस्तावेजों के साथ।
  6. समन: कोर्ट संतुष्ट होने पर आरोपी को समन जारी करता है।
  7. नोटिस ऑफ एक्यूजेशन, सबूत और बहस।
  8. फैसला: दोषसिद्धि, जुर्माना या बरी।

नोटिस कैसे भेजें, इसके लिए हमारी legal notice in Delhi गाइड देखें।

समय-सीमा एक नजर में

चरणसमय-सीमा
चेक की वैधताचेक की तारीख से 3 महीने
कानूनी नोटिसरिटर्न मेमो की सूचना से 30 दिन
भुगतान का समयनोटिस मिलने से 15 दिन
शिकायत दायर करना15 दिन पूरे होने के बाद 1 महीना
केस का निपटाराआमतौर पर 1–3 साल

दिल्ली में केस कहां दायर करें?

धारा 142(2) के अनुसार, केस उस कोर्ट में दायर होता है जिसके क्षेत्र में शिकायतकर्ता के बैंक की वह शाखा है जहां उसका खाता है और चेक जमा किया गया। दिल्ली में हर जिला न्यायालय परिसर में NI Act की विशेष अदालतें हैं, जैसे रोहिणी, तीस हजारी, साकेत, द्वारका और कड़कड़डूमा।

जरूरी दस्तावेज

दस्तावेजउद्देश्य
मूल चेकअपराध का मुख्य सबूत
बैंक रिटर्न मेमोचेक लौटने का प्रमाण
कानूनी नोटिस और डाक रसीद/ट्रैकिंगनोटिस भेजने का प्रमाण
लेन-देन के सबूत (एग्रीमेंट, बिल, चैट)देनदारी का प्रमाण
शिकायतकर्ता का हलफनामासबूत के रूप में

सजा, अंतरिम मुआवजा और समझौता

  • सजा: दो साल तक कैद, या चेक राशि के दोगुने तक जुर्माना, या दोनों।
  • धारा 143A: कोर्ट शिकायतकर्ता को चेक राशि का 20% तक अंतरिम मुआवजा दिला सकता है।
  • धारा 148: अपील में दोषी को जुर्माने/मुआवजे का कम से कम 20% जमा करना पड़ सकता है।
  • धारा 147: अपराध समझौते योग्य है; किसी भी चरण पर समझौता हो सकता है।

रोहिणी कोर्ट में हमारे अनुभव में ज्यादातर चेक बाउंस केस मध्यस्थता या लोक अदालत में किश्तों के समझौते से निपट जाते हैं। सही समय पर नोटिस भेजना सबसे जरूरी है, क्योंकि देरी से पूरा केस खत्म हो सकता है।

चेक बाउंस वकील कैसे मदद करते हैं

एक cheque bounce lawyer in Delhi समय-सीमा की जांच, नोटिस का मसौदा, शिकायत दायर करने और अंतरिम मुआवजे के लिए आवेदन में मदद करता है। राशि की वसूली के लिए Order 37 summary suit भी साथ में दायर किया जा सकता है। अंग्रेजी में पूरी गाइड: cheque bounce case in Delhi।

अपनी स्थिति के अनुसार सलाह के लिए आप किसी योग्य अधिवक्ता से परामर्श कर सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चेक बाउंस होने पर नोटिस कितने दिन में भेजना होता है?

बैंक से चेक लौटने की सूचना (रिटर्न मेमो) मिलने के 30 दिन के भीतर लिखित नोटिस भेजना जरूरी है। नोटिस में चेक की राशि की मांग होनी चाहिए। देरी होने पर धारा 138 का केस नहीं बनता, इसलिए तारीखों का ध्यान रखें।

चेक बाउंस केस में कितनी सजा होती है?

धारा 138 के तहत दोषी को दो साल तक की कैद, चेक राशि के दोगुने तक जुर्माना, या दोनों हो सकते हैं। व्यवहार में कोर्ट अक्सर मुआवजे पर जोर देता है। अपराध समझौते योग्य है, इसलिए भुगतान करके केस खत्म किया जा सकता है।

दिल्ली में चेक बाउंस केस कहां दायर करें?

केस उस कोर्ट में दायर होता है जिसके क्षेत्र में शिकायतकर्ता के बैंक की वह शाखा है जहां उसका खाता है और चेक जमा किया गया। दिल्ली के हर जिला न्यायालय परिसर में NI Act की विशेष अदालतें हैं, जैसे रोहिणी और तीस हजारी।

क्या चेक बाउंस केस में समझौता हो सकता है?

हां। धारा 147 के अनुसार यह अपराध समझौते योग्य है। केस के किसी भी चरण में, यहां तक कि अपील में भी, दोनों पक्ष समझौता कर सकते हैं। दिल्ली में मध्यस्थता केंद्र और लोक अदालत में ऐसे कई मामले किश्तों के समझौते से निपटते हैं।

चेक बाउंस केस में कितना समय लगता है?

दिल्ली में आमतौर पर एक से तीन साल लगते हैं, जो आरोपी की पेशी, सबूत और कोर्ट के कामकाज पर निर्भर है। अगर आरोपी जल्दी समझौता कर ले, तो केस कुछ महीनों में भी खत्म हो सकता है। अंतरिम मुआवजा केस के दौरान भी मिल सकता है।

क्या आरोपी को गिरफ्तार किया जाता है?

आम तौर पर नहीं। चेक बाउंस शिकायत केस है, इसमें पुलिस FIR नहीं होती। कोर्ट समन जारी करता है। अगर आरोपी बार-बार पेश नहीं होता, तो जमानती या गैर-जमानती वारंट जारी हो सकता है। पेश होने पर आमतौर पर जमानत मिल जाती है।

निष्कर्ष

चेक बाउंस केस में सबसे जरूरी है समय-सीमा का पालन। सही समय पर नोटिस और शिकायत दायर करने से वसूली और समझौते की संभावना काफी बढ़ जाती है।

यह गाइड नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट, 1881 की धारा 138 से 148 (India Code पर उपलब्ध) के आधार पर तैयार की गई है।

Advocate Shubham Mehta, SRLM Law Associates, Delhi

Written and reviewed by Advocate Shubham Mehta
Advocate, Bar Council of Delhi (Enrl. No. D/6398/2021), and head of SRLM Law Associates. He practises before Rohini Courts, other Delhi District Courts, Family Courts, consumer commissions and the Delhi High Court. More about the firm

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This article is for general information only and is not legal advice.